ब्लोगिंग कोई खेल नहीं
[मानसिक रूप से एक स्वस्थ्य ब्लोगर होने के नाते गांधी जयंती के अवसर पर मैंने एक संकल्प लिया है - तीव्र गति से बढ़ते अपने हिंदी ब्लॉगजगत में यथासंभव गुणवत्ता वाली सामग्री ही प्रविष्ट करूँगा. कुछ भी व्यर्थ लिखने से अच्छा होगा की मैं दुसरो के सद्विचारों को प्रोत्साहित करूँ या अन्य जरुरी कार्य करूँ अथवा विश्राम करूँ. व्यक्तिगत आक्षेपों, बिना साक्ष्य के दस्तावेजी छेड़छाड़, महज भीड़ जुटाने वाली व्यर्थ की सनसनी और दूषित विचारों या कुतर्कों का मैं वाहक नहीं बनूँगा. सरल, निर्बाध, ओजपूर्ण, ज्ञानवर्धक, साहसिक, कोमल, स्मरणीय, ऐतिहासिक, साहित्यिक, रोचक, मनोरंजक एवं सामयिक परिचर्चाओं से पटे वेबपृष्ठों व शब्दमालाओं की कड़ियाँ हिंदी ब्लॉगजगत को समृद्धि एवं विविधता प्रदान करती रहे ऐसी कामना करता हूँ. सभी नए पुराने सहयात्रियों से विनम्र अनुरोध है की स्वर्णकाल को बनाए रखने में जहाँ भी उचित समझे अपना अंशदान दें. इसी सन्दर्भ में मेरी आज की पोस्ट "ब्लोगिंग कोई खेल नहीं" प्रस्तुत है.]
आजकल ब्लोगजगत में एक ख़ास किस्म की हवा बह रही है जिसके प्रभाव में आकर कुछ ब्लोगर एक जैसी पोस्ट पर लगातार चर्चा कर रहे है… प्रतिक्रिया में इन्नोसेंट कमेंट्स का भी पोस्टमार्टम किया जा रहा है… कहीं पर यह भी देखने को मिला – कुछ पुराने ब्लोग्गरों के उपलब्धियों एवं व्यवहारों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है…
त्वरित मीडिया का हालिया इतिहास यही बताता है की इस तरह की परिचर्चाओं ने सदैव सबका ध्यान खींचा है. इन सबके पिछे कुछ मूल तत्व हैं जो अपनी जगह कायम है. मसलन हर सक्रिय ब्लोगर एक नियमित अन्तराल पर एक पोस्ट डाल देता है जिसका सभी इंतजार करते है. इनमे से अच्छे, सारगर्भित और जायकेदार पोस्टों पर प्रबुद्ध पाठक अपनी प्रतिक्रया देते हैं और सहयात्री होने का अपना ब्लोगधर्म निभाते हैं. कुल मिलाकर ब्लॉग जगत को समृद्ध कर निरंतर दिशा दे रहे हैं. यह संतोषजनक और सुखद है.
परन्तु ये क्या?? कुछ ब्लोगर अति कर देते हैं (शुभ भाव से लिखा है) !!
- कोई बिना विराम के लगातार पोस्ट पे पोस्ट ठेल रहे हैं. (पेशेवर मीडियाकर्मी कर सकते हैं) इससे सामान विषयों पर पुनरावृति लेख की संभावना ज्यादा रहती है. बेहतर होगा, पोस्ट पब्लिश करने से पहले एक सरसरी निगाह से अधिकाँश पोस्टों को देखा जाये, उचित सन्दर्भ मिलने पर अपने पोस्ट को संक्षिप्त रख लिंक किया जाये तो ब्लोगरी सुखद, सरस और प्रिय लगेगा.
- कोई ब्लॉगर महज टिपण्णी लिखने की खानापूर्ति के लिए बारम्बार आग्रह ईमेल भेजते हैं. (देश बचाओ और जनहित मामलो में ऐसा जरुर किया जाए)
- कोई टिप्पणियों के मार्फ़त असंगत लिंक एक्सचेंज कर रहे हैं (अनामियों या spammer को माफ़ है).
- कुछ नौसिखिये गैरजरूरी विजेट्स और भारी भरकम तस्वीरें लगा कर अपने ब्लॉग पृष्ठों का शोषण कर रहे हैं. यह भूलते हुए की धीमा इन्टरनेट डाटा गति वाले क्षेत्रो में पेजलोडिंग के समय इनकी जान पे बन आती है (फोटोग्राफर आर्टिस्ट वर्ग को आजादी है).
अपील है नए उत्साही ब्लोगरो से… पहले देखिये, समझिये, विचारिये.. हिंदी ब्लॉगजगत के इस स्वर्णकाल(मेरा मतलब वातावरण में प्रदुषण, गैरजिम्मेदाराना व्यवहार और अराजक परिस्थितियों से पहले वाला काल से है) में ये वक़्त है पहले स्वस्थ्य व नवीन चर्चाये कर अपनी क्षमताओं को पहचानने का, गुणवत्ता तराशने का… और साथ साथ अपने यूनिक अनुभव मार्केट में शेयर करने का.. याद रखिये शब्दों के इस महासमुद्र में गहरे गोते लगाने की जरूरत है तब जाके कुछ सहेजने लायक मोती हासिल होंगे… इन्ही मोतियों से मालाएं बनाने की जिम्मेदारी भी हमसभी को उठाने है. ताकि अगली पीढी को हिंदी ब्लॉगजगत एक विशाल धरोहर के रूप में मिले… कुछ वैसे ही जैसे हम ऋणी हैं अपने पूर्वजों द्बारा रचित ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल और साहित्य-संस्कारों के अक्षय भण्डार से.
…और भी कई जरूरी बातें हैं लेकिन मैं लम्बी पोस्ट लिखने के पक्ष में नहीं हूँ… इस मौके पर वासिम साहब(शायर) का एक शेर अर्ज करना चाहूँगा. खासकर नए ब्लोगरो से अपील है पसंद आये तो दिल में उतार लेना मेरे दोस्त.
“कौनसी बात, कब और कहाँ कहनी चाहिए
ये सलीका आता हो तो हर बात सुनी जायेगी “
बहरहाल ब्लोगिंग टाइम पास जरूर है लेकिन बहुतों के लिए ये एक खूबसूरत शौक है.
कईयों के के लिए ब्लोगिस्तान एक मायानगरी है जहाँ उनके सपने आकार लेते हैं… ब्लोगिंग कोई खेल नहीं है; ये तो अपना गाँव चौपाल है जहाँ अभिव्यक्ति की आजादी है… कईयों के लिए एक मिशन है… एक सेवा है…
- सुलभ (10-10-2009)


ब्लोगिंग कोई खेल नहीं है; ये तो अपना गाँव चौपाल है जहाँ अभिव्यक्ति की आजादी है… कईयों के लिए एक मिशन है… एक सेवा है…
बहुत खूब भाई, सच बयानी.
हार्दिक बधाई.
दीपावली और भैया-दूज के इस पावन पर्व पर आपको और आपके परिवार को हम सब की अनन्त हार्दिक शुभकामनाएं……………
चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
http://www.cmgupta.blogspot.com
बहुत खूब भाई, सच, सच और सच के सिवा कुछ नहीं ……………..
हार्दिक बधाई.
दीपावली और भैया-दूज के इस पावन पर्व पर आपको और आपके परिवार को हम सब की अनन्त हार्दिक शुभकामनाएं……………
चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
http://www.cmgupta.blogspot.com
Sulabh,
yahan jo bhi likha hai aapne shabd-shabd saty hai….
mujhe isi baat ki koft hoti hai…chittha ki charcha karne waalon ko thoda aur reaserch karne ki avashyakta hogi…na jaane kitne moti bas yun hi talhatti mein pade hain koi nahi hai unhein dekhne waala…
bahut accha likha hai aapne …pasand aayi aapki baat…
shukriyaa..
तो ये भी बता दीजिये की कैसे पता करीं की हम ब्लोगिंग करने के लायक हैं भी या नहीं ?
कोई टेस्ट ?
ankit
आप नियमित किसी एक विषय पर लिखना आरम्भ कीजिये, कोशिश ऐसी हो की आप नयी चीज़ रोचक तरीके से परोसें.
शुभकामनाएं
- सुलभ